निराकार

निराकार या अब्स्ट्रक्ट किसे कहते है ? अगर मैं ये कहूँकि साकार जैसी कोई चीज होती ही नहीं तो तुम क्या कहोगे या ये कहूं कि एब्स्ट्रेक्ट ही सत्य है तो तुम क्या कहोगे ? दरअसल जब तक किसी भी चीज का आकर तय नहीं होता या हमें उसके आकर और नाम कि ठीक से पहचान नहीं होती तब तक हर चीज एब्स्ट्रेक्ट है ।एब्स्ट्रेक्ट सत्य है ,प्रारम्भ से पहले और अंत के बाद सिर्फ और सिर्फ एब्स्ट्रेक्ट है ।जैसे मिटटी निराकार है और उससे बने बर्तन साकार फिर जब बर्तन फुट जाये टुकड़े टुकड़े हो जाये तो फिर से निराकार ।बादल,पहाड़ ,नदियां ,सब निराकार ही तो है ।मैंने अक्सर लोगों को ये कहते सुना है कि एब्स्ट्रेक्ट का मतलब जो समझ में न आये ।ऐसा नहीं है।जहाँ पर आप कि ग्रामर ख़तम हो जाती है वहीं से निराकार कि शुरुवात होती है ।साकार तो एक थोड़े से समय के लिए होता है निराकार सर्वकालिक है ।हमारे शरीर को ही ले लो जन्म से पहले यह क्या था और मृत्यु के बाद क्या होगा ,निराकार ।सच तो ये है कि जिन चीजों को हम आसानी से समझ पते है या जो हमें पहले से जानी पहचानी होती है उन्हें हम जल्दी स्वीकार कर लेते है ,उनके लिए हमारे मस्तिष्क को परिश्रम नहीं करना पड़ता इसीलिए साकार हमारे लिए अच्छा और निराकार हमारे लिए बुरा हो जाता है ।आनंद जो होता वो निराकार में होता है जैसे-विसर्जन या बारात में नाचना ,होली में रंग खेलना ,अंताछरी में गाने गाना समंदर कि लहरों को देखना,पंछियों का उड़ना ,उनका चहचहाना ,नदी का किसी झरने से गिरते समय चंचल हो जाना ये सब ऐसे सुख है जिनकी ग्रामर नहीं होती ,ये निराकार है ।यद् रहे जिस भी चीज का आकर निश्चित है उसका एक ग्रामर जरूर होगा और जिसमे ग्रामर होगा उसके आनंद कि एक सीमा होगी। Ashish Mohan Maqtool

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