खूबशूरत रिस्तेदारी

।दोस्ती एक ऐसा रिस्ता है जिसमे मतलब नहीं होता,इसमें शिकायते भी नहीं होती।आप कितने भी थके हो पर भाई ने बोला तो जाना ही पड़ेगा ।आप कितने भी व्यस्त हो पर भाई ने बोला तो उसका काम पहले,२ चाय में ४ लोग ,खुद के लिए भले ही न जगे हो पर दोस्त के लिए सारी सारी रात जग कर उसका काम करवाना ,और कमाल की बात है की इन सब चीजों का कोई भी हिसाब नहीं ।दोस्ती एक ऐसा तोहफा है जो किस्मत से आप को नशीब होता है ,मुझे याद है मैं आज जितना खुद को कमज़ोर पता हूँ उतना दोस्तों के साथ कभी नहीं था ।आप की आँख में एक भी आशु आजाये तो आप का दोस्त दुनिया में आग लगाने पर आ जाता है वो बोलते थे न की भाई तुझे सिर्फ मैं रुलाऊंगा बाकि अगर कोई और आया तो उसकी......... । आज भी जब कभी भगदौड़ से थक जाता हूँ , टूटने लगता हूँ तो जी करता है की कोई दोस्त होता तो आकर बोल देता- क्यों मुँह लटकाये बैठे हो गर्लफ्रेंड भाग गई क्या ..? अच्छा आप सोच कर देखो आपस में कम्पटीसन भी था मगर जीत किसी की भी हो पार्टी सारे मिल कर देते थे,भले बाद में पैसे मांग मांग कर जीना हराम कर दे । दोस्त थे जिन्होंने मेरी ज़िंदगी को अपनी मौजूदगी से महका दिया सबने कुछ न कुछ सिखाया ही है सच कहूं तो मुझे आज तक जो भी दोस्त मिले वो सब एक से बढ़ कर एक थे,मुझे एक बार को ज़िन्दगी से शिकायत हो सकती है पर दोस्तों से नहीं,मुझे ये बेहतर पता है की की मैं कई मामलो में कमज़ोर पड़ जाता हूँ पर उन सभी जगहों पर दोस्त काम आये । कुछ रिश्ते वो होते है जो आप को पैदा होने के साथ मिल जाते है कुछ जो आप पर थोप दिए जाते है और कुछ वो होते है जो आप बनाते हो,जो रिश्ते आप को बने बनाये मिलते है उन्हें आप को जबरन निभाने पड़ते है भले आप की मर्ज़ी हो या नहीं ,पर जो आप बनाते है वो आप की मर्ज़ी पर निभर होते है,उनमे दिखावा नहीं होता,आप की ज़िंदगी को आसान यही रिश्ते बनाते है जो आप ने बनाये है,।ये रिश्ते दोस्ती के होते है ,दोस्त कभी आप से शिकायत नहीं करते.. तुमने उन्हें फोन नहीं किया ,मिलने नहीं आये,तुमने नया टी.वि. ले लिया औरउसे बताया नहीं ऐसी फालतू बाते नहीं करते है,उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता की तुम कितनी सैलरी पाते हो । सेलरी से फर्क तो उन्हें पड़ता है जो आप के तथाकथित शुभचिंतक है, इन्हे आप के हर मामले में दख़ल करनी होती है चाहे वो बात इनके मतलब की हो या न हो । आप के हर काम में इनकी सलाह ज़रूरी हो जाती है अगर आप ने नहीं ली और वो काम बिगड़ गया तो इनका पहला शब्द होगा देखा.... हमने तो पहले ही कहा था।अब कोई इनसे पूछे की तुम जगन्नाथ हो ,अंतर्यामी हो और एक बात है आप एक बार को भगवन को तो संतुस्ट कर सकते हो पर रिस्तेदारो को नहीं। दोस्ती दुनिया की सबसे खूबशूरत रिस्तेदारी है मुझे दोस्त बनाना बहुत पसंद है।

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