चाय और दर्शन..1

तुमरी नज़र मा ज़िंदगी का है ? चचा ने माहौल को नापते हुए सवाल दे मारा। पूरा लखनऊ तो नहीं मगर पूरा डालीगंज इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ है की लल्लन चचा कोई भी बात यूँ ही तो नहीं कहते । उनके पास बड़ा अनुभव है ।अपनी तिरसठ साल की उम्र में लगभग चार सरकारी और छे डेकेदारो के साथ काम कर चुके हैं ।अब लड़का आगरा में जूता फैक्ट्री में हेड कारीगर है तो कमाने की जरुरत कुछ खास है नहीं ।उम्र भी हो रही है फिर चाय की दुकान पर बैठ कर ज्ञान पेलने से बड़ा सुख और किसी चीज में है भी नहीं ।हमारे जैसे चार- छे आर्ट्स कॉलेज के लड़के चाय पिने के बहाने बैठे ही रहते है और चचा उनका ज्ञान बढ़ाते रहते हैं । महादेव भाई बैठ कर बस मुस्कराते ही रहते है और मुस्कराये भी क्यों न इसी बहाने उनकी चाय की बिक्री होती रहती है ।अगर आप कभी डालीगंज जाएँ तो ध्यान रखियेगा अगर कोई सफ़ेद कुरता पायजामा पाने साढ़े तीन- चार फिट का आदमी दिखे जिसके जिसके हाथ में गोल्डन कलर की घडी हो और वो मुस्करा रहा हो तो समझ जाइयेग की लल्लन चचा आप के सामने प्रकट हो चुके है और वो आप का एक -दो घंटा बिना डकार मरे खाने वाले हैं । चलो अब चचा के सवाल की ओर रुख करते हैं । हाँ तो चचा क्या कह रहे थे आप (मैंने पूछा ) । अमा बहिरे हाउ का,हम पूछ रहे है की तुमरी नज़र माँ ज़िंदगी का है?(चचा ने पान का पीक हलक में उतारते हुए पूछा ) ज़िंदगी का मतलब है एक बड़ी सी गाड़ी एक बड़ा सा घर और ढेर सारा पैसा । कुछ करने को हो ही न सिर्फ मौज मस्ती ।हर काम के लिए एक नौकर । मस्त लाइफ होगी ।(मेरे एक दोस्त ने मेरे जवाब देने से पहले ही जवाब दे डाला) चचा देखो ज़िंदगी में बड़ा सा नाम हो जाये,पैसो का क्या है,इतने हों की आराम से काम चले । बहुत ज्यादा का लालच नहीं है । हमको तो नाम चाहिए बस।(मैंने चाय का कप बेंच पर रखते हुए कहा ) अखंड मूरख हो तुम लोग(चचा ने पान थूकते हुए कहा और बेंच पर दोनों पैर ऊपर करके बैठ गए और बोले )-ज़िंदगी का मतलब सिर्फ नाम या पैसा नहीं है,ज़िंदगी वो तोहफा है जो ऊपर वाले ने हमें दिया है समझेव ।अच्छा एक बात बताओ हमारा पैदा होना निश्चित है और मरना निश्चित है तो बीच का टेम कहे मिला । पैसा कमाने के लिए,नहीं । बेटा ज़िंदगी जीने के लिए मिला है टेम जियो,खुल के जियो । रूपया पैसा तो सिर्फ ज़िंदगी जीने में सहायक हुई सकत है ज़िंदगी नहीं हुई सकत । गज़ब चचा क्या बात बोली है(मैंने कहा ) । देखो अब अगर सिगरेट पिलाईहो तब मिलिहे आगे का ज्ञान ।(इतना कह कर चचा भद्द से बेंच पर बैठ गए ) ठीक है ठीक है माँगा रहे है तुम प्रबचन चालू रखो (मेरे दोस्त ने कहा और उठ कर सिगरेट लेने चला गया ) (चचा ने अपनी बात फिर शुरू की ) बेटा,आदमी सुविधा के पीछे पागल है मगर ये भी बहुत बड़ा सच है की सुविधा ,ज़रूरत कभी पूरी नहीं हो सकती । आदमी का दिमाग बहुत लालची होता है ,ये कभी भी संतुस्ट नहीं हो सकता । ज़िंदगी का जीने की ज़रूरत है,लालच जितना करोगे ज़िंदगी उतनी ही कठिन हो जाएगी । हम बहुत जगह काम किया बहुत तरह के आदमीं के साथ काम किया मगर बेटा असली शुकुन असली मज़ा तो सिर्फ तब ही आया जब हम छोटे रहे । तुम खुद सोच कर देखो तुम सबसे ज्यादा खुश कब थे। एक आवाज़ आएगी बचपन । ऐसा का कारन है की बचपन सबसे ज्यादा शुकुन देता है, सबसे ज्यादा सुन्दर होता है । कारन ये है की बचपन मा जरूरते कम थी,स्वार्थ कम था,लालच कम था । एक- एक दिन को जीने की इच्छा थी इसीलिए । ज़िंदगी बहुत कमल की चीच है अगर जियो तो,नहीं तो एक- एक दिन बोझ बनजाये । लो चचा कलेजा जलाओ(दोस्त ने आकर बात काट दी,और चचा ने सिगरेट लेकर महादेव से माचिस मांगी और जला ली) हाँ तो हम क्या कह रहे थे (चचा ने पहला काश लेते हुए पूछा ) तुम हमको पका रहे थे(दोस्त ने बैठते हुए कहा ) यार सुन तो आज चचा बढ़िया बात बता रहे हैं ।आप कह रहे थे कि ज़िंदगी बहुत कमल की चीज है ।(मैंने दोस्त के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा ) हम्म्म.. ज़िंदगी सच में कमाल की चीज़ है ।हम जब भी पीछे मुड़ कर देखते है तो लगता है कोई बहुत खूबसूरत सी फिल्म देख रहे हो । देखो ऐसा ज़रूरी नहीं है की ज़िंदगी में हमेशा खुशिया मिले, सब मिलिहे मगर बारी -बारी से। ज़िंदगी जो है वो बड़की भौजी की तरह है ये कब तुमसे मज़ाक कर जाये पता नहीं और कब जरा सी बात पर भैया से मर खिला दे पता नहीं । ये माँ की तरह ख्याल रख सकती है तो दोस्त की तरह तुम्हारे सरे राज़ छुपा सकती है । दिक्कत क्या है पता है ,हम खुद से बहुत दूर हो गए है । अपने आप को हम टेम देते ही नहीं,खुद को जानने समझने की फुर्सत ही नहीं है । बस लगे पड़े है स्टेटस मेनटेन करने में । अरे जब तुम्ही नहीं रहोगे तो कहे का स्टेटस ,कहे का पैसा कहे की सुविधा । हमरे बाप ज़िंदगी भर पैसा कमाते रहे ,बुढ़ौती तक कुछ पैसा जोड़ भी लिये थे मगर हुवा का ,हमरे जनम के एक महीने बाद डकैती परी अउ सब लूट गया । सदमे मा अटैक पड़ा और खुद भी चले गए । अब हमरी अम्मा हम तीनो भाई का लेके कहाँ जाती,फिर से संघर्ष शुरू ।कोई के घरे बर्तन मांजे,या सिलाई करे । जब हम बड़े हुए तो हम जिये ,एक- एक दिन जिए एक- एक मिनट जिए । जब हम मरेंगे न तो हमको कउनो बात का अफशोस नहीं होगा । जब हमरी मौत आएगी तो हम कह देंगे - अरे ज़िंदगी तुम भी न ,अब जाने दो ।(चचा ने गहरी साँस लेते हुए कहा । ).........................To be continue

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